Hindi Kahani : चिंटू की शरारत : Hindi Moral Stories for Kids

Hindi Kahani : चिंटू की शरारत : Hindi Moral Stories for Kids

Hindi Kahani : चिंटू की शरारत : Hindi Moral Stories for Kids

चिंटू की शरारत

 

बहुत समय पहले की बात है | दीपावली का समय था चिंटू के चेहरे पर ख़ुशी देखते नही बन रही थी |

दीपावली उसका सबसे प्रिय त्यौहार था, और होता भी क्यों ना, उसे चलाने के लिये बहुत सारे पटाखे जो मिलने वाले थे| इस बार चिंटू के पापा उसके लिये बहुत सारे बम, रोकेट और फुलझड़ी लेकर आये थे | इतने सरे पटाखे देखकर चिंटू के मन मे एक शरारत उमड़ी |

उसने दो-तीन बम उठाए और घर के पीछे पहुँच गया | वहा पर कुछ छोटी छोटी पुराणी मटकियां पड़ी हुई थी | चिंटू ने बम को ज़मीन पर रखा और उसमे आग लगाकर फुर्ती से उसके ऊपर मटकी रख दी और पीछे हट गया |

बम धडाम से फटा, जोरदार अव के साथ मटकी के भी टुकड़े टुकड़े हो गए |चिंटू को बड़ा मजा आया ओर वो खुशी के मारे जोर-जोर से तालीयां  बजाने लगा |

Hindi Kahani : चिंटू की शरारत : Hindi Moral Stories for Kids

धमाके की तेज आवाज सुनकर उसकी मम्मी बाहर आया गयी और उन्होंने जमीन पर मटकी और बम के टुकड़े बिखरे हुए देखे | मम्मी समझ गईं ,” तो यह सब तुम्हारी शैतानी थी |

मम्मी ने चिनू को समझाते हुए कहा कि अचछे बच्चे इस तरह के खतरनाक शैतानिया नही किया करते है | अगर मटकी क कोई टुकड़ा उड़कर तुम्हे लग जाता तो ?

चलो छड़ो ये शरारत और पढाई कर लो | चितु ने सोचा कि यहाँ तो मम्मी ने मना कर दिया है क्यों न घर के बाहर सड़क पर जाकर पटाखे फोड़े जाये |

खूब मजा आयेगा | यह सोचकर चिंटू ने दो मटकिया उठाई और चुपके-से सड़क के पास पहुँच गया | वहा पर उसे अपना दोस्त अखिल दिखयी दिया |

चिंटू ने कहा – आओ अखिल, एक नया तमाशा करते है | चिंटू ने अकिल को मटकियां दिखाते हुए कहा | नहि चिंटू, ऐसा मत करना | यह खेल खतरनाक साबित हो सकता है |

ऐसा करने से किसी को भी चोट काग सकती है | अखिल ने उसकी शैतानी भांपकर कहा | तुम्हे नही देखना है तो मत देखो, मैं तो इन्हें फोडूंगा |

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कहने के साथ ही चिंटू ने सड़क के बीच मे एक बम जलाकर उस पर मटकी रख दी और पीछे हट गया | धडाम से बम की आवाज के साथ मटकी के टुकड़े छितरा गए |

अखिल अपने कानो पर हाथ रेक दूर खड़ा रहा |फिर एक बार और चिंटू ने बम जलाकर मटकी उसके ऊपर रख दी | लेकिन अबकी बार जब कुछ समय तक बम नही फूटा तो वह मटकी की तरफ बढ़ा |

दूर खड़े अखिल ने जब चिंटू को मटकी की तरफ जाते देखा  तो चिल्लाकर बोला – चिंटू आगे मत बढ़ो | बम मे चिंगारी छिपी हो सकती है |

कहने के साथ ही वह उसकी तरफ दौड़ा | पर तब तक चिंटू मटकी के पास पहुँच चुका था | तभी अचानक से धडाम के साथ मटकी फूट गयी |

इसी के साथ्चिन्तु वहा चीख मरते हुए गिर पड़ा | उसके चेहरे तथा हाथ-पांव से खून बह रहा था | यह देख अखिल भागकर चिंटू की मम्मी को बुला लाया |

चिंटू को खून मे लात- पथ देखकर मम्मी ने रोन शुरु कर दिया |पड़ोसियों के चुप करने पर वे चिंटू को कार मे लिटालकर अस्पताल ले गईं |

डॉक्टर ने फ़ौरन चिंटू का इलाज शरू कर दिया | कुछ देर बाद डॉक्टर  ने कहा .’ भगवानका शुक्र है कि चिंटू को जादा चोट नही आई” |

साथ ही इसकी आंखे बी सही सलामत है | बस , मटकी के टुकड़े लगने से शरर पर घाव हो गए है | जिन पर मैंने पट्टी बांध दी है |

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आप चाहे तो अब चिंटू को घर ले आ सकती है | कुछ  दिनो मे यह पूरी अरह से ठीक हो जायेगा | आह ! कराहते हुए चिंटू ने अपनी आँखे खोली |

अपने आस-पास मम्मी-पापा और छोटी बहन को देखकर उसकी आँखे भर आई |

चिंटू – मीने तुम्हे पहले ही कहा था कि इसी हालत मे रहन पड़ेगा |

पापा ने कहा – इस बार तुम दीपावली भी  नही मना पाओगे | चिंटू यह सब सुनकर बोला – मम्मी पापा , मिझे अपनी गलती का सबक मिल गया है |

मै वादा करता हूँ कि आगे से फिर कभी ऐसी भूल नही होगी |  यह कहते हुए चितु की आँखों मे सच्चाई की झलक साफ़ नजर आ रही थी | 

हिंदी कहानी से सीख (Hindi Kahani) : शरारत करने की भी एक सीमा होती है | कभी-कभी उसका दुष्परिणाम खुद को ही भुगतना पड़ता है | बाद मे पछताने के सिवाय कुछ नही मिलता है |


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