अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियां | Akbar Birbal ki kahani

अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियां | Akbar Birbal ki kahani

अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियां | Akbar Birbal ki kahani

अकबर-बीरबल की मजेदार कहानियाँ-किस्से हमेशा से लोकप्रिय रही है आपने भी अपने बचपन मे कभी न कभी (Akbar Birbal Ki Kahani) अकबर-बीरबल की कोई न कोई कहानी ज़रूर सुनी होगी.

अकबर-बीरबल की कहानियां न केवल बहुत मशहूर हैं, बल्कि यह मनोरंजक और शिक्षाप्रद भी होती हैं. हँसी-मजाक से परिपूर्ण यह कहानियाँ बच्चों का मनोरंजन भी करेंगी और साथ ही प्रत्येक कहानी व्यावहारिक ज्ञान से भरी हुई है।

ये मजेदार कहानियाँ आपको बहुत कुछ सिखाएंगी. हम आपके लिये ऐसी ही अकबर और बीरबल की 11 मजेदार कहानियों की श्रंखला लेकर आये है और उम्मीद करते है कि बच्चों को इन कहानियों को पढ़ने मे बहुत मजा आएगा |


 अकबर और बीरबल की कहानी : बीरबल की खिचड़ी | Birbal ki khichdi Hindi Story 

एक बार की बात है बादशाह अकबर ने घोषणा की कि जो व्यक्ति ठंड के इस मौसम में ठण्डे पानी में रात भर खड़ा रहेगा, उसे हम शाही खजाने से इनाम देंगे |

बादशाह की इस घोषणा को एक धोबी ने भी सुना |

वह बहुत गरीब था और उसको अपनी बेटी की शादी के लिये पैसो की भी जरूरत थी |

इसलिये उस गरीब धोबी ने पूरी रात नदी मे खड़े होने का फैसला कर लिया |

बादशाह के बताये हुए समय पर वह धोबी रात को उस नदी के ठन्डे पानी मे खड़ा होने के लिये चला गया |

वहां पहुंचकर उसने देखा कि नदी का पानी बहुत ही ज्यादा ठंडा है और आस-पास कोई आग भी नही जल रही है |

वह धोबी नदी के गहरे पानी मे जाकर खड़ा हो गया, पानी बहुत ही ज्यादा ठंडा था और धोबी को बहुत जोर से ठंड लग रही थी,

उसे लगा कि अगर वह रात भर इस ठन्डे पानी मे खड़ा रहा तो वह मर जायेगा |

तभी उसे दूर मंदिर मे एक दिया जलता हुआ दिखाई दिया और उसने उस दिए को देखते-देखते पूरी रात उस ठन्डे पानी मे गुजार दी |

अगले दिन सुबह धोबी बादशाह के दरबार में आकर इनाम मांगने लगा |

बादशाह ने धोबी से पूंछा – ” हम कैसे माने कि तुम सारी रात पानी मे खड़े रहे ?”

धोबी बोला – महाराज ! “में सारी रात ठन्डे पानी में दूर मंदिर मे जलते हुए उस दिए को देखकर खड़ा रहा |”

बादशाह ने सुका जवाब सुनकर कहा – इसका मतलब कि तुम मंदिर के दिए की आंच के कारण सारी रात ठन्डे पानी में खड़े रहे, इसलिये तुम इनाम के सच्चे हक़दार नहीं हो | 

यह सब सुनकर धोबी वहां से निराश होकर चला गया |

बीरबल दरबार में बैठे यह सब देख रहे थे और उन्होंने तभी बादशाह को सबक सिखाने के लिये एक तरकीब सोच ली |

बादशाह ने अगले दिन बीरबल को दरबार में न पाकर, एक खादिम को उन्हें बुलाने के लिये भेजा |

खादिम ने आकर सूचना दी – बीरबल जी ने कहा है कि जब तक उनकी खिचड़ी पूरी तरह से पक नही जाएगी तब तक वे दरबार में नही आ सकेंगे |

बादशाह अकबर को यह सब सुनकर बड़ा ही आश्चर्य हुआ और वह अपने दरबारियों को लेकर बीरबल के घर पहुँच गए |

बादशाह ने देखा कि तीन लम्बे-लम्बे डंडों के ऊपर एक हंडिया में चावल डालकर उसे लटकाया गया है और नीचे जमीन पर आग जल रही है |

यह सब देख बादशाह ने बीरबल से पूँछा – ये सब क्या है ! इतनी दूरी पर रखी हंडिया में खिचड़ी कैसे पक जाएगी ?

बीरबल बोले – जरूर पक जाएगी महाराज |

बादशाह ने कौतुहल वश पूंछा – कैसे ? बीरबल बोले – “ठीक वैसे ही महाराज जैसे दूर मंदिर मे जलते दिए की गर्मी की आंच से वह धोबी रात भर पानी मे खड़ा रहा था |”

बादशाह अकबर बीरबल का उत्तर सुनकर समझ गए कि बीरबल उनसे क्या कहना चाहते हैं |

उन्होंने तुरंत ही उस धोबी को बुलाने का आदेश दिया और ख़जाने से इनाम देने का आदेश जारी किया | 

 


 बीरबल की मजेदार कहानी तंत्र-मन्त्र  : Tantra-Mantra Story in Hindi 

एक बार कुछ दरबारियों ने बादशाह अकबर से कहा- महाराज ! आजकल बीरबल को ज्योतिष का शौक चढ़ा है |

बीरबल कहते हैं कि में मन्त्रों से कुछ भी कर सकता हूँ | 

बादशाह अकबर बोले – अच्छा, ऐसी बात है ! उन्होंने कहा – में बीरबल की परीक्षा लेता हूँ और देखता हूँ कि बीरबल के मन्त्रों मे कितना दम है |

यह कहते बादशाह ने एक दरबारी को अपनी अंगूठी देते हुए कहा कि तुम एक कहीं छिपा दो,

आज हम बीरबल से इस अंगूठी के बारे में ही पूँछेगे |

तभी बीरबल दरबार में आ जाते है और बादशाह अकबर को प्रणाम करके अपनी गद्दी पर जाकर बैठ जाते है |

अकबर ने कहा – बीरबल अभी-अभी मेरी अंगूठी कहीं गायब हो गयी है, ज़रा पता लगाओ |

हमने सुना है कि उम तंत्र-मंत्र से कुछ भी कर सकते हो |

बीरबल ने दरबारियों की तरफ देखा और वह समझ गए कि उनके विरुद्ध राजा के कान भरे गए है |

उन्होंने कुछ सोचा और फिर एक कागज़ पर टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें खींच दी |

फिर बीरबल बोले – महारज, आप इस पर अपना हाथ रखें, आपकी अंगूठी जहाँ भी होगी अपने – आप ऊँगली में आ जाएगी |

राजा ने उस रेखाओं वाले कागज पर अपना हाथ रख दिया तभी बीरबल ने कुछ चावल हाथ में लेकर दरबारियों की तरफ फेंक दिए |

जिस दरबारी के पास अंगूठी थी, वह सोचने लगा कि कहीं सचमुच अंगूठी निकलकर राजा के पास न पहुँच जाये |

उसने कसकर जेब पर हाथ रख लिया |

बीरबल यह सब देख रहे थे |

बीरबल बोले – महारज, अंगूठी तो मिल गयी है लेकिन उसे दरबारी ने कसकर पकड़ रखा है |

बादशाह अकबर – बीरबल का यह संकेत समझकर हंस पड़े |

उन्होंने वह अंगूठी पुरस्कार के रूप में बीरबल को दे दी |   

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 छोटी लकीर, बड़ी लकीर : Chhoti Lakir, Badi Lakir Kids Story 

एक दिन बादशाह अकबर ने सोचा कि क्यों न आज दरबारियों की परीक्षा की जाये |

बादशाह दरबार में पहुँच कर एक कागज़ और कलम मँगायी और फिर कागज़ पर एक लम्बी-सी लकीर खींच देते है|

फिर सभी दरबारियों से कहते है कि जो इस लकीर को बिना काटे और बिना मिटाए छोटी करके दिखायेगा हम उसे पुरस्कार देंगे |

सभी दरबारी अपना-अपना दिमाग लगाने लगे |

कुछ तो एक – दूसरे के मुँह की तरफ देखने लगे |

किसी को भी यह समझ में नही आ रहा था कि इस लकीर को बिना काटे या मिटाए छोटा कैसे करें |

आखिर में अकबर ने बीरबल को अपने पास बुला कर कहा कि तुम इसे बिना काटे और बिना मिटाए छोटा करके दिखाओ |

बीरबल ने उसी वक्त उस लकीर के बराबर में कलम से एक और बड़ी लकीर खीँच दी

और कहा – अब देखिये महाराज, आपकी खिंची हुई लकीर इससे छोटी हो गयी है |

बादशाह अकबर यह देखकर बहुत खुश हुए और मन ही मन बीरबल की अक्ल की दाद देने लगे |

बादशाह अकबर ने बीरबल को पुरस्क्रत भी किया |

बादशाह अकबर हमेशा कोशिश करते रहते है कि किसी प्रकार बीरबल को शिकस्त से सकें |

 


 गरदन टेढ़ी क्यों है  : Akbar birbal ki kahani 

एक बार की बात है बादशाह अकबर किसी बात पर बीरबल की चतुराई से खुश हो गए और उन्होंने बीरबल को सौ एकड़ जमीन उपहार के रूप मे देने का वचन दे दिया | 

बीरबल यह सुनकर बहुत खुश हुए |

बहुत दिन बीत गए पर बादशाह अकबर ने अपना वचन पूरा नही किया |

बीरबल ने कई बार बादशाह अकबर को अपने दिए हुए वचन कि याद दिलाया,

लेकिन बादशाह अकबर हर बार बड़ी ही चतुराई से उनकी बात को घुमा देते या फिर अपनी गरदन घुमा कर दूसरी तरफ देखने लगते |

बीरबल को अब समझ मे आ गया कि बादशाह जानबूझ कर उनकी बात को अनसुना कर रहे हैं

जिससे कि उनको अपना किया हुआ वादा पूरा न करना पड़े |

एक दिन शाम को बादशाह अकबर और बीरबल घूमने निकले |

अकबर को सामने से एक ऊँट आता दिखा |

उन्होंने ऊँट को देखकर बीरबल से पूँछा- बीरबल इस ऊँट की गरदन टेढ़ी क्यों है?

बीरबल तुरंत बोले- जहाँपना ! यह ऊँट पिछले जन्म में एक बादशाह था और इसने अपने वज़ीर को सौ एकड़ ज़मीन उपहार के रूप में देने का  वचन दिया था |

लेकन बादशाह अपना दिया हुआ वचन भूल गए थे |

उनका वजीर जब उन्हें अपना दिया हुआ वचन याद दिलाता तब वे अपनी गरदन घुमा कर दूसरी तरफ़ देखने लगते |

ऐसा करते-करते उनकी गरदन टेढ़ी हो गई |

बीरबल का जवाब सुनकर बादशाह अकबर सबकुछ समझ गए और बहुत खुश हुए

और उन्होंने अगले ही दिन बीरबल को सौ एकड़ ज़मीन उपहार के रूप में देकर अपनी गलती सुधारी | 

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हथेली पर बाल : Birbal ke Majedar Kisse 

बादशाह अकबर दरबार में बैठे थे कि तभी अचानक उनके मन में एक सवाल आया

और उन्होंने दरबार में बैठे सभी मंत्रिजनों से पूँछा – क्या आप बता सकते है कि मेरी हथेली पर बाल क्यों नही हैं ?

इस पर सभी मंत्रिगढ़ एक स्वर में बोल उठे कि महाराज – हथेली पर बाल होते ही नही है |

सभी मंत्रिगढ़ गर्व से फूल गए कि आज उन्होंने बादशाह के सवाल का बीरबल से पहले जवाब दे दिया,

मगर बादशाह अकबर को इस सीधे-साधे ज़वाब से सन्तुष्टि नही मिली |

बादशाह ने फिर पूँछा – आखिर क्यों नही होते हैं ?

अब तो सभी मंत्रिगढ़ चुप हो गए |

सोचने लगे कि अब  क्या जवाब दें ! जब हथेली पर बाल होते ही नहीं है, तो होते ही नहीं हैं |

सभी को चुप देखकर बादशाह ने बीरबल की तरफ देखा और पूँछा – बीरबल तुम्हारा क्या ख्याल है ?

बीरबल ने कहा – महाराज ! आप रोज़-रोज़ गरीबों को दान देते है जिससे आपकी हथेली लगातार घिसती रहती है |

इसलिये आपकी हथेली पर बाल नही उग पाते |

बीरबल का जवाब सुनकर बादशाह खुश हो गए, मगर उन्होंने तुरंत ही दूसरा सवाल किया,

माना कि दान देते रहने से हमरी हथेली पर बाल नही उग पाते, लेकिन तुम्हारी हाथेली पर बाल क्यों नही है ?

बीरबल बोले – महाराज ! आप रोज़-रोज़ मुझे ढेरों उपहार देते रहते है |

उन उपहारों को लेते-लेते मेरी हथेली भी तो घिसती है |

इसलिये मेरी हथेली पर भी बाल नही उगते |

बादशाह अकबर ने सोचा कि बीरबल बहुत चालाक है, लेकिन आज वे बीरबल को किसी तरह से हराना चाहते थे |

इसलिये महाराज ने फिर से पूँछा – चलो माना कि तुम्हारी और मेरी हथेलियाँ तो घिसती रहती है,

लेकिन यहाँ बैठे सभी मंत्रीगण और दरबारियों की हथेली पर भी तो बाल नही उगते, इसका कारण क्या है ?

बीरबल ने हँसते हुए कहा – महाराज ये तो बिलकुल आसान है !

जब आप मुझे रोज़-रोज़ उपहार देते है, तब यहाँ बैठे सभी दरबारियों और मंत्रियों को इससे बहुत इर्ष्या होती है और वे हाथ मलते रहते है |

यदि हथेलियाँ लगातार घिसती रहें तो उनपर बाल कैसे उगेंगे ?

यह सुनकर बादशह अकबर खिलखिला कर हँस पड़े आर उन्होंने सभी दरबारियों के सामने बीरबल की बहुत तारीफ़ की |   


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   दाढ़ी की कीमत : Birbal ki Majedar Kahaniya

बीरबल और अकबर दरबार में बैठे थे |

अकबर ने बीरबल से पूँछा – बताओ बीरबल ! दुनियां मे कौन ज्यादा चालाक है और ज्यादा मूर्ख ?

बीरबल बोले – महाराज ! मेरी समझ से मुल्ला मूर्ख होते हैं और बनिए चालाक |

महाराज  बोले – कैसे ?

बीरबल ने कहा – ठीक है महाराज ! बीरबल ने उसी समय दरबार में एक नाई को बुलावाया |

फिर बीरबल ने पहले मुल्ला जी को बुलावा लिया |

मुल्ला जी सहमे हुए थे क्योकि वो पहली बार दरबार में आये थे |

बीरबल बोले – मुल्ला जी ! बादशाह सलामत को आपकी दाढ़ी चाहिए,

आपको इसकी मुँह मांगी कीमत दी जायेगी, आप जो चाहे मांग सकते हो |

मुल्ला जी बहुत डरे हुए थे, उन्होंने झिझकते हुए कहा – ठीक है महाराज ! जैसी आपकी इच्छा | 

मुल्ला जी को पहले ही बहुत डर लग रहा था, उन्होंने सोचा कि चलो सस्ते में जान छूट रही है इसलिये वह फ़ौरन राजी हो गया |

बीरबल ने पूँछा – क्या कीमत दी जाए आपकी दाढ़ी की ? मुला जी डरते-डरते बोले 20 रुपये दिलवा दीजियेगा सरकार |

बीरबल मे मुल्ला जी को 20 रुपये देकर नाई को इशारा किया, और नाई ने झट से मुल्ला जी कि दाढ़ी मूंड दी |

इसके बाद आदेश मिलते ही मुल्ला जी वहाँ से भाग लिये |

इसके बाद बीरबल ने दरबार में एक बनिए को बुलवाया और उससे कहा – देखो महाराज को तुम्हारी दाढ़ी चाहिए | 

इसके बदले में तुम जो कीमत चाहोगे तुम्हें मिलेगी |

बनिये ने कहा – महाराज मैं बहुत ही गरीब आदमी हूँ |

बनिया अपनी दाढ़ी पकड़कर गिडगिडाने लगा |

बीरबल ने कहा – इसमे अमीर-गरीब की क्या बात है |

अपनी दाढ़ी की कीमत बोलो और दाढ़ी दो |

बनिए के आना-कानी करने पर बीरबल गुस्से से बोले – अगर तुमने हमारी आज्ञा का पालन नही किया तो तुम्हें दण्ड मिलेगा |

बनिया डर गया, उसने कहा – नही -नही महाराज, इंकार कैसा ?

मगर महाराज बात ये है कि जब दादी मरी थी यह दाढ़ी मूंडवायी थी और इसमे मेरे बीस हजार रूपये खर्च हो गए थे |

बीरबल ने कहा – ठीक है,तुम्हे हम बीस हजार देते हैं | 

बीरबल ने उसे बीस हजार रुपये दिए और नाई को इशारा कर दिया |

नाई ने आगे बढ़कर जैसे ही दाढ़ी पकड़ी, बनिए ने उसके गाल पर एक जोर से चांटा मार दिया और बोला – नामाकूल ! अदब से पेश आ |

अब ये बादशाह सलामत की दाढी है |

यह सुनकर बादशाह को गुस्सा आ गया और उन्होंने सिपाहियों से कहकर उस बनिए को धक्के मार कर बाहर निकलवा दिया |

थोड़ी देर बाद जब बादशाह शांत हुए, तब बीरबल बोले – देखा महाराज ! बनिया कितना चालाक निकला |

उसने दाढ़ी भी नही कटवाई और आपसे बीस हजार रुपये भी ले गया |

बीरबल की यह बात सुनकर बादशाह अकबर बाद मे बहुत हँसे |

 


मोम का शेर : Akabar-Birbal ki Kahaniya

पुराने समय में राजा एक दूसरे कि बुद्धि की परीक्षा लिया करते थे |

एक बार फारस के बादशाह  ने अकबर को बुद्धि की परीक्षा लेने के लिये एक शेर बनवाया और उसे पिंजरे में बंद करवा दिया |

इस पिंजरे को रजा ने अपने एक दूत के हाथों बादशाह अकबर के पास एक संदेश के साथ भिजवा दिया |

संदेश में लिखा था कि यदि उनके दरबार मे कोई बुद्धिमान पुरुष है तो वह इस शेर को बिना पिंजरा खोले ही निकालकर दिखाए,

साथ ही यह शर्त भी रख दी कि अगर इस पहेली को हल ना कर सके तो फारस के महाराज उनके पूरे राज्य पर अपना अधिकार कर लेंगे |

बादशाह अकबर इस अनोखी पहेली को देखकर बहुत ही परेशान हो गए कि इस पहेल को कौन सुलझाएगा

क्योकि बीरबल इस समय उनके पास नही थे |

उन्होंने अपने सभी मंत्रीयो के सामने इस पहेली को रखा लेकिन कोई भी मंत्री इस पहेली का हल नही बता सका |

बादशाह अकबर और ज्यादा परेशान हो गए और शोचने लगे कि कहीं उनकी इज्ज़त मिट्टी मे ना मिल जाए |

अगर वे इस पहेली को नही सुलझा पाए तो यह राज्य भी उनके हाथ से चला जायेगा | 

उसी समय बीरबल वहां आ गए, बादशाह बीरबल को देखकर बहुत प्रसन्न हुए,

उन्होंने सोचा कि बीरबल तो इस पहेली को ज़रूर हल कर देंगे और उनकी इज्ज़त बच जाएगी |

बादशाह ने बीरबल के सामने इस पहेली को रखा और सारी घटना बताई |

बीरबल ने उस शेर को अच्छी तरह से देखा,

फिर उन्होंने एक गर्म लोहे की छड मंगाई और उस छड से थोड़ी ही देर में उस शेर को उस पिजरे से गायब कर दिया | 

कारण यह था कि बीरबल पहचान गए थे कि शेर मोम का बना हुआ था जो कि देखने में धातु का लग रहा था |

फारस का राजदूत बीरबल की बुद्धिमता को देखकर दंग रह गया और बादशाह अकबर यह सब देखकर बहुत ही खुश हुए |

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अकबर के पांच सवाल : Akbar ke 5 Sawal 

एक बार बादशाह अकबर ने अपने मंत्रियों से  पांच सवाल किये,

और कहा कि जो भी इस पाचों सवालों के सही सही जवाब देगा में उसको अपने राज्य का महामंत्री बना दूंगा |

महारज ने पूँछा – फूल कौन-सा अच्छा ? दूध किसका अच्छा ? मिठास किसकी अच्छी ? पत्ता किसका अच्छा ? और राजा कौन अच्छा ?

बादशाह के इस सवालों को सुनकर सभासदों ने अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार उत्तर दिए |

किसी ने गुलाब तो किसी ने कमल के फूल को अच्छा बताया |

इसी तरह दूध के लिये किसी ने गाय तो किसी ने भैंस को अच्छा बताया |

मिठास के लिये किसी ने केले को तो किसी ने आम को अच्छा बताया |

पत्ते के लिये किसी ने तुलसी तो किसी ने नीम को अच्छा कहा |

जब रजा वाले प्रश्न की बारी आई तो सभी ने एक ही स्वर मे बादशाह अकबर को अच्छा बोला |

बादशाह इस सभी जवाबो को सुनकर खुश तो हो गए लेकिन उनके मन को सन्तुष्टि नही हुई |

उन्होंने फिर से वही सरे सवाल दुबारा बीरबल से पूँछे |

“बीरबल ने महाराज के सभी सवालों का इस तरह से जवाब दिया |”

उन्होंने कहा – महाराज ! कपास का फूल सबसे अच्छा होता है क्योंकि इससे तन ढकने के लिये कपडे बनते हैं |

दूध हमेशा माँ का अच्छा होता है क्योंकि इससे बच्चे का विकास होता है |

मिठास हमेशा वाणी की अच्छी होती है क्योकि इससे सभी के मन को जीता जा सकता है |

पत्ता पान का अच्छा होता है, जिसको देने से दुश्मन भी मित्र बन जाता है,

और राजाओं मे सर्वश्रेष्ठ इंद्र है क्योंकि उनकी आज्ञा के बिना बादल पानी नही बरसाते | 

बीरबल के उत्तर को सुनकर अकबर बहुत प्रसन्न हुए और दरबारियों को संबोधित करते हुए कहा – ‘देखो, बीरबल की बुद्धिमानी को !

इसीलिए मैं बीरबल को सर्वश्रेष्ठ मानता हूँ |

बादशाह अकबर ने दरबार में घोषणा की कि बीरबल को आज से महामंत्री हैं |


गाय का मालिक कौन ? : Akbar Birbal ki kahani

एक बार शाम के समय एक ग्वाला अपनी गाय चराकर जंगल से लौट रहा था |

तभी उसे रास्ते मे एक चोर मिला जो ग्वाले को डरा-धमका कर उसकी गाय छीन कर ले गया |

ग्वाला बेचारा बहुत दुखी हो गया क्योंकि उसी गाय का दूध बेचकर अपने परिवर का पालन – पोषण करता था |

ग्वाला अपनी फरियाद लेकर बादशाह अकबर के दरबार में पहुँचा और वहां पहुँच कर पूरी घटना बताई |

अकबर ने तुरंत अपने सेनापति को उस चोर को पकड़ने का आदेश दिया |

अगले दिन सेनापति दरबार में उस चोर को और ग्वाले को लेकर उपस्थित हो गए |

बीरबल ने उस चोर से पूँछा – बताओ तुमने इस ग्वाले की गाय क्यों चुरायी ?

चोर ने कहा – नही महाराज ! मैंने गाय नही चुरायी ये, तो मेरी ही गाय है, 

ग्वाले ने भी कहा – नही महाराज ! ये मेरी गाय है |

बीरबल बोले – ठीक है !

यदि ये गाय तुम्हारी है तो तुम्हे इसका नाम भी मालूम होगा |

तुम दोनों बारी-बारी मेरे पास आओ और मेरे कान मे इस गाय का नाम बताओ |

फिर में न्याय करूंगा |

दोनों ने बारी-बारी आकर बीरबल के कान मे गाय का नाम बताया |

बीरबल ने उस चोर से कहा – तुमने जो मुझे गाय का नाम बताया है, अब उसी नाम से गाय को पुकार कर अपने पास बुलाओ |

चोर ने बड़े प्यार से गाय को पुकारा – गौरी ! गौरी ! आओ गौरी मेरे पास आओ |

चोर ने बहुत कोशिश करी मगर गाय टस से मस नही हुई |

अब ग्वाले की बारी आई, उसने जैसे ही गाय को बुलाया – कपिला ! मेरी गैमता ! आओ मेरे पास |

अपने मालिक की आवाज सुनकर गाय के कान खड़े हो गए और वो उसके पास आ गयी |

गावाला बड़े प्यार से उसपर हाथ फेरने लगा और अपने पास देकर उसकी आँखों मे आंशू आ गए |

बीरबल ने तुरंत चोर को पकड़ने का आदेश दिया और इस तरह से चोर पकड़ा गया |

बादशाह ने उस चोर को काल-कोठरी मे बंद करके 100 कोड़े मारने का आदेश दिया |

इस तरह से एक बार फिर बादशाह अकबर बीरबल की चतुराई से प्रसन्न हुए और उन्होंने दरबार मे बीरबल की बहुत प्रशंशा की | 

 


तीन गधों का भार : Bachcho ki Kahani

एक दिन बादशाह अकबर अपने दोनों शहजादों के साथ घूमने निकले |

हमेशा की तरह बीरबल भी उनके साथ ही थे |

घूमते घुमते अकबर एक नदी के पास पहुँच गए, गर्मी बहुत पड़ रही थी,

नदी का साफ़ और ठंडा पानी देखकर उनका नहाने का मन करने लगा |

उन्होंने अपने दोनों शहजादों से नहाने के लिये पूँछा तो वे भी तैयार हो गए |

बीरबल ठन्डे पानी मे नही नहाना चाहते थे,

इसलिये अकबर और दोनों शहजादो ने अपने-अपने कपडे उतार-कर बीरबल को दे दिए

और वे नदी के ठंडे पानी मे नहाने के लिये चले गए |

बीरबल ने सभी कपडे अपने कंधे पर रख लिये |

अकबर ने तैरते तैरते बीरबल की तरफ देखा और वह मन ही मन सोचने लगे – बड़ा ही मूर्ख है बीरबल !

यहाँ नहाने का मजा लेने के बजाय कंधे पर कपडे लिये किनारे पर बैठा है |

महाराज को मजाक सूझा और उन्होंने कहा – बीरबल !

तुम्हार कंधे पर तो गधे जैसा बोझ आ पड़ा है |

बीरबल चौंके – वह समझ गए कि महाराज उनको गधा कहकर पुकार रहे है |

फिर क्या था ? बीरबल कहाँ चूकते है |

उन्होंने फ़ौरन जवाब दिया – महाराज ! एक गधे का नही तीन-तीन गधों का बोझ आ पड़ा है |

यह सुनकर बादशाह अकबर की बोलती बंद हो गयी, अब वो क्या कहते !

वह समझ गए और बीरबल के इस कटाक्ष पर हसने लगे |

महाराज ने सोचा कि बीरबल से जीतना वाकई मे बहुत मुश्किल है |

 


   तिनके के सहारे : Tinke ke Sahare Birbal Story 

बादशाह अकबर अपने कुछ दरबारियों और बीरबल के साथ नौका विहार के लिये निकले |

नाव जब नदी के बीचों- बीच पहुँची तो बादशाह को एक मजाक सूझा |

बादशाह एक तिनका दिखाकर सभी से कहते हैं – जो इस तिनके के शहारे इस नदी को पार कर लेगा,

मैं उसे एक दिन के लिये दिल्ली का बादशाह बना दूंगा |

दरबारी जब तक कुछ सोच पाते बीरबल ने तुरंत कहा – महाराज में यह कर सकता हूँ लेकिन ऐसा करने के पहले ही आपको मुझे आज एक दिन लिए बादशाह घोषित करना होगा |

बादशाह बोले – ठीक है, में तुम्हे एक दिन के लिये बादशाह घोषित करता हूँ, अब तुम इस तिनके के सहारे नदी पार करके दिखाओ |

अगर नही कर पाए तो तुम्हें सज़ा मिलेगी |

यह कहकर बादशाह ने तिनका बीरबल के हाथ मे दे दिया |

बीरबल तिनका लेकर नदी में कूदने को हुए, लेकिन कूदने से पहले उन्होंने अपने अंगरक्षकों से कहा – में इस समय बादशाह हूँ |

तुम अपने कर्तव्य का पालन करो |

यह सुनते ही अंगरक्षकों ने बीरबल को पकड़ लिया और बोले – आप बादशाह है !

इसलिये हम आपको अपनी जान जोखिम में नही डालने देंगे |

बीरबल ने अंगरक्षकों को समझाया, मगर वे नहीं माने | इतने में नौका दूसरे किनारे जाने लगी |

यह देख-कर बादशाह बोले – बीरबल तुम हार गए |

हारा कहाँ महाराज ! इस तिनके के सहारे ही तो मैंने नदी को पार किया है |

यह अगर तिनका मेरे पास नही होता तो मैं बादशाह नही होता, और ये अंगरक्षक मुझे कूदने से भला क्यों रोकते ?

बादशाह अकबर हँसकर बोले – बीरबल ! तुमसे जीतना सचमुच मुश्किल है |


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