पेड़ की गवाही : बच्चों की मजेदार कहानी | Bachcho Ki Kahani Indai 2021

पेड़ की गवाही : बच्चों की मजेदार कहानी | Bachcho Ki Kahani Indai 2021

चाणक्य का नाम बाला किसने नही सुना है | सम्राट चन्द्रगुप्त के महामंत्री थे “चाणक्य “| उनकी सूझ – बूझ kii बहुत सारी कहनियाँ प्रसिद्ध है | उन्ही मे आज एक प्रसिद्ध कहानी आज हम आपको सुना रहे है |

एक बार सम्राट चन्द्रगुप्त के दरबार मे एक बुजुर्ग किसान रोता – रोता आया और बोला, ‘ महाराज ‘ ! मैं तो आज लुट, गया बर्बाद हो गया |

मेरे मित्र शीलभद्र ने मेरा सारा धन हड़प लिया और मुझे बर्बाद कर दिया |

चन्द्रगुप्त महाराज बोले – साफ -साफ कहो कि क्या बात है ?

बुजुर्ग किसान ने कहा – महाराज ! मैं एक गरीब किसान हूँ, मेरा नाम पंचानन है | कुछ समय पहले मैं तीर्थ यात्रा पर गया था |

जाते समय मैंने अपना सारा धन अपने मित्र के पास रखकर गया था | मैंने कहा था कि तीर्थ यात्रा से लौटने पर ले लूँगा परन्तु अब वापस आने पर वह मित्र मुझे पहचानता भी नही है |

कहता है – कौन सा धन ? कैसा धन ? मैंने तो तुम्हे पहले कभी देखा ही नही | महाराज ! मैं क्या करूँ? मेरे साथ न्याय कीजिए |

महाराज ने पूंछा -‘ कितना धन था तुम्हारा ?’ किसान बोला – ‘महाराज! सात हजार सिक्के थे |’

महाराज ने पूछा – क्या तुमने धन देते समय अपने मित्र के साथ कोई लिखा – पढ़ी की थी ? क्या तुम्हारे पास कोई गवाह है ?

किसान ने सर झुकाकर कहा – महाराज ! मैं अपने मित्र पर बहुत अधिक विश्वाश करता था इसलिये कोई लिखा – पढ़ी नही की | मंदिर के बाहर उस जगह पर कोई आता – जाता भी नही है |

इसलिए मुझे धन देते हुए और शीलभद्र को धन  लेते हुए किसी ने भी नही देखा | महाराज ने आज्ञा दी कि शीलभद्र को दरबार मे बुलाया जाये |

शीलभद्र आया | बूढ़े किसान ने फिर से अपनी बात दोहराई | महाराज ने शीलभद्र से पूछा – क्या यह किसान सत्य कह रहा है ?

पेड़ की गवाही : बच्चों की मजेदार कहानी | Bachcho Ki Kahani Indai 2021

शीलभद्र बोला – महाराज ! यह आदमी झूठ बोल रहा है | मैं तो इसे जानता तक नही | किसी अंजान  व्यक्ति क धन भला मैं अपने पास क्यों रखूँगा, वो भी बिना लिखा – पढ़ी के ?

इन महाशय को तो मैने आज पहली बार देखा है | ये किस मंदिर का जिक्र कर रहे है , मैं तो उस मंदिर को जनता भी नही | फिर वहा पर जाने की बात तो दूर की है |

महाराज ने अपने महामंत्री चाणक्य की तरफ देखा | महमंत्री सारी बात समझ गए और उन्होंने  उन दोनों को अगले दिन दरबार मे उपस्थित होने का आदेश दिया |

चाणक्य ने महाराज से कहा – आप इस मुक़दमे क फैसला मुझ  पर छोड़ दीजिये, मैं स्वयं न्याय करूँगा |  सुबह होते  ही दोनों सभा मे उपस्थित हुए |

दोनों ने अपनी – अपनी बात दोहराई |

महामंत्री ने किसान से पूंछा –  तुमने मंदिर बाहर किस स्थान पर धन दिया था ? किसान बोला – महोदय ! मंदिर के बाहर एक पीपल का पेड़ है |

उसके चबूतरे पर शीलभद्र बैठा था | वही मैंने उसे धन दिया था | महामंत्री ने पूंछा – धन देते समय तुम्हे किसी ने देखा हो या ना देखा हो, पेड़ ने तो अवश्य ही देखा होगा |

बूढ़ा आदमी सकुचाते हुए बिला – जी महामंत्री ! मंत्री जी बोले – जाओ , उस पेड़ को बुला कर ले आओ |

वह गवाही देगा | हिचकिचाते हुए किसान पेड़ को लेने चला गया | सुबह से दोपहर होने को आई परन्तु किसान लौट कर नही आया | शीलभद्र बैठे – बैठे परेशान हो गया था |

महाराज ने पूंछा – क्या मंदिर बहुत दूर है जो बूढ़ा आदमी अभी तक नही आया ? भूख प्यास और गर्मी से परेशान, झाल्ल्या हुआ शीलभद्र बोला , महाराज ! मंदिर तो कोई जादा दूर नही है |

मै  इतनी देर मे मंदिर के बीस चक्कर लगा कर आ सकता था | लेकिन वह आदमी गया हो तब न ! वह तो बहुत झूठा और पाखंडी है |

जरूर घर जाकर खा – पीकर आरम कर रहा होगा | महामंत्री ने मुस्कुराते हुए शीलभद्र से पूछा – क्यों शीलभद्र , अभी  तुम कह रहे थे कि तुम तो वहा कभी गए ही नही |

पेड़ की गवाही : बच्चों की मजेदार कहानी | Bachcho Ki Kahani Indai 2021

तुम अब कैसे कह रहे हो कि मंदिर पास ही है ? निश्चय ही वह बूढ़ा किसान सच कह रहा है और तुम झूठ बोल रहे हो | तुमने अवश्य ही उसका धन हड़प लिया है |

अब अपनी इच्छा से उसका धन वापस कर दो, नही तो राजदंड के भागी बनोगे | शीलभद्र स्वयं अपनी बात के जाल मे फस गया था |

उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था और उसने बूढ़े को उसका धन बापस करने का प्रण भी लिया | थोड़ी देर बाद वह किसान भी वापस आ गया |

ह बहुत थका – थका सा लग रहा था | किसान ने कहा – महोदय ! मैंने पेड़ से बहुत विनती की परन्तु वह गवाही देने नही आया |

महामंत्री चाणक्य ने कहा – नही, वह आया था | वह गवाही देकर चला गया | तुम्हारा मित्र शीलभद्र मान गया है, उसने ही तुम्हारा धन लिया है |

अब वह धन वापस देने को तैयार है | इस प्रकार चाणक्य ने अपनी  बुद्धि – कौशल द्वारा बिना प्रमाण एवं साक्षी के दूध क दूध और पानी का  पानी कर दिया | 

पेड़ की गवाही कहानी से सीख : चोरी करना और झूठ बोलना बुरी बात होती है | चोर कितना भी चालक क्यों न हो एक दिन पकड़ा ही जाता है |       


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